मंदार षष्ठी विधि एवं कथा - mandar sashti Vrat Vidhi and Katha

माघ शुक्ल पक्ष के षष्ठी तिथि को मंदार षष्ठी (Mandar Sashti) का व्रत होता है। इस वर्ष यह ०२ फरवरी, २०१७ (2nd Feb 2017) को है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत में भगवान सुर्य की उपासना की जाती है। सुर्य के पूजा –उपासना से सभी प्रकार की मनोकामनायें पूर्ण होती है।

पूजन हेतु सामग्री:
• सुर्य की मूर्ति- हाथ में कमल लिये हुये (सम्भव हो तो सुवर्ण की)
•ताम्र पात्र
•काला तिल
•पुष्प
•धूप
•दीप
•केसर
•चंदन- लाल
•घी
•नैवेद्य
•वस्त्र

पूजा विधि:-

माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को सात्विक भोजन करे। यदि सम्भव हो तो एक समय ही भोजन ग्रहण करें। षष्ठी को प्रात:काल उठकर नित्य क्रम कर स्नान कर ले एवं स्वच्छ वस्त्र धारण कर ले। पूजा गृह को शुद्ध कर लें। आसन पर बैठ जायें। ताम्रपात्र में काले तिल से अष्टदल कमल बनाये। इस पर सुर्य देव की मूर्ति स्थापित करें। अष्टदल की पूजा पूर्व से पश्चिम के क्रम में आरम्भ करें। एक-एक कमल दल पर और मध्य भाग पर चंदन, अक्ष त, धूप, दीप, वस्त्र एवं नैवेद्य अर्पित करते हुये मंत्र उच्चारण के साथ भगवान सुर्य की पूजा करें:-
“ऊँ भास्कराय नम:” (पूर्व दिशा में)
“ऊँ सुर्याय नम:” (अग्निकोण में)
“ऊँ अर्काय नम:” ( दक्षिण में)
“ऊँ अर्यम्णे नम: ” ( नैर्ऋत्य में)
“ऊँ वसुधात्रे नम:” ( पश्चिम में)
“ऊँ चण्दभानवे नम:” (वायव्यमें)
“ऊँ पूष्णे नम: ” ( उत्तर में)
“ऊँ आनंदाय नम: ” ( ईशानकोण में )
“ऊँ सर्वात्मने पुरुषायनम: ” (कमल की मध्यवर्ती कर्णिका में)
पूजा के बाद सुर्य देव की आरती करें।

आरती श्री सूर्य जी

जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
सप्त-अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस-मल-हारी॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
सकल - सुकर्म - प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व-विलोचन मोचन, भव-बन्धन भारी॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
कमल-समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत साहज हरत अति मनसिज-संतापा॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
नेत्र-व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा-हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान-मोह सब, तत्त्वज्ञान दीजै॥
॥ जय कश्यप-नन्दन .. ॥
आरती का प्रोक्षण कर सभी को आरती दें। व्रत के दिन केवल मंदार के पुष्प ग्रहण करें। सप्तमी को प्रात:काल उठकर स्नान कर सुर्य देव की पूजा करें। ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान दें। तत्पश्चात् पूर्वाभिमुख होकर तेल तथा नमक ग्रहण कर पारण करें ।इस प्रकार से प्रत्येक मास के शुक्ल-षष्ठी को व्रत करें।

मंदार षष्ठी उद्यापन विधि:-

यह व्रत पूरे एक वर्ष तक विधिपूर्वक प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को करें। वर्ष के अंत में इस व्रत का उद्यापन करें। षष्ठी को व्रत रख सुर्य भगवान की विधिपूर्वकपूजा करें । सप्तमी को प्रात:काल उठकर शुद्ध हो, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सुर्य की मूर्ति को कलश पर स्थापित करें । चंदन, अक्षत, धूप, दीप एवं नैवेद्य से विधिपूर्वक सुर्य देव की पूजा करें। उसके बाद कलश को सुर्य की मूर्ति सहित किसी ब्राह्मण को निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ दान दें :-
नमो मन्दारनाथाय मन्दारभवनाय च ।
त्वं च वै तारयस्वास्मानस्मात् संसारकर्दमात्॥
सामर्थ्यानुसार अन्य सामग्री भी दक्षिणा के रूप में ब्राह्मण को प्रदान करें।

मंदार षष्ठी व्रत कथा प्रारम्भ (mandar sashti Vrat Katha Starts)

mandar shasti in hindi

Next. ⇒


सोमवती अमावस्या व्रत विधि, कथा एवं उद्यापन हिंदी में- हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं ।
Somvati Amavasya vrat vidhi and Katha in Hindi According to Hindi Calender Amavasya falls in every month. But when it comes on Monday it is called Somvati Amavasya.

वट सावित्री व्रत विधि, पूजन सामग्री एवं कथा हिंदी में- ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती है उसका सुहाग अमर हो जाता है।
Vat Savitri Vrat Katha and Pujan Vidhi in Hindi - Vat savitri falls on amavasya tithi of krishna paksha jyeshta month. The woman who did this Vrat has got immortal suhag.

अनंत चतुर्दशी व्रत विधि एवं कथा हिंदी में - अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है । यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है ।
Anant Chaturdashi Vrat Katha and Vidhi in Hindi- People Worshipped God vishnu on Anant Chaturdashi. It falls on fourth day of Shukla Paksha Bhadra Month.

करवा चौथ व्रत विधि एवं कथा - करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिये करती हैं।
Karwa Chauth vrat vidhi and katha in Hindi - Karvaa chauth celebrates on fourth day of waning moon in kaartik month. Married women keep this fast with benediction of her husband long life.

© 2016 - vratkatha.in - All rights reserved

About Contact Disclaimer