गुप्त नवरात्र पूजा - Gupta Navratri Puja Vidhi

माघ शुक्ल पक्ष में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्र कहते हैं। गुप्त नवरात्र में अधिकांशत: तंत्र विद्या की साधना की जाती है। तंत्र विद्या की साधना के लिये देवी की विशेष पूजा की जाती है। सभी प्रकार की विपत्तियों से बचाव के लिए गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की उपासना की जाती है। गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना करने का प्रचलन है। गुप्त नवरात्रि विशेषकर शक्ति साधना, तांत्रिक क्रियाएं, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।
चूँकि माघ मास की नवरात्रि में गुप्त रूप से शिव व शक्ति की उपासना की जाती है इसलिये यह नवरात्रि गुप्त नवरात्रि के नाम से जानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से गुप्त सिद्धियां पाने का के लिये महत्त्वपूर्ण है इसी कारण से साधक गुप्त नवरात्रि में विशेष साधना कर चमत्कारिक शक्तियां को प्राप्त करते हैं।

गुप्त नवरात्री की 10 महादेविया:-

गुप्त नवरात्रियों में 10 महादेवियों के साधना कर शक्ति और महाविद्या प्राप्त की जाती है। इन 10 महादेवियों की साधना से मनोवांछित कामना पूर्ण होती है। दिव्य शक्ति और महाविद्या की प्राप्ति के लिए माँ काली, तारा देवी, त्रिपुरी सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माता ध्रुमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा करते है:- काली:-
माता काली के उपासना से मनुष्य बुरे ग्रह के प्रभाव , मांगलिक बाधा, अकाल मृत्यु, काल सर्प आदि से बचाव तथा लम्बी आयु पाता है।
तारा:-
माँ तारा की साधना से तीव्र बुद्धि तथा उच्च शिक्षा की प्राप्ति होती है।
त्रिपुर सुंदरी:-
सुंदर काया, स्वास्थ्य तथाव्यक्तिगत विकास के लिये माँ त्रिपुर सुन्दरी की उपासना की जाती है।.
भुवनेस्वरी देवी:-
भुवनेस्वरी देवी की आराधना से भूमि, भवन तथा वाहन सुख की प्राप्ति होती है।
छिन्नमस्ता देवी:-
नौकरी मे सफलता एवं रोजगार पाने के लिए माता छिन्नमस्ता की पूजा करनी चाहिये।
त्रिपुर भैरवी:-
त्रिपुर भैरवी की आराधना से प्रेम में सफलता तथा मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
धूमावती देवी:-
माँ धूमावती की पूजा से सभी प्रकार के टोटकों का प्रभाव नष्ट होता है।
बगलामुखी देवी:-
प्रतियोगिता तथा क़ानूनी मामलो में सफलता एवं शत्रु के नाश के लिए माँ बगलामुखी की आराधना करनी चाहिए.
मातंगी देवी:-
मातंगी देवी की पूजा से संतान प्राप्ति होती है।
कमला देवी:-
कमला देवी की पूजा से माँ लक्ष्मी की कृपा आती है।

पूजा विधि :-

गुप्त नवरात्र में भी प्रथम दिन नौं दिनों के पूजा उपासना का संकल्प और घटस्थापना की जाती है। उसके बाद प्रतिदिन सुबह और शाम माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। अष्टमी और नवमी को कन्या पूजन करना चाहिये। नवमी को हवन तथा पूजा का उद्यापन किया जाता है।

पौराणिक कथा:-

प्राचीन काल की बात है ऋषि श्रृंगी के पास एक स्त्री आयी और अपने दोनों हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करने लगी - “हे महर्षि! मैं एक अबला नारी हूँ। मेरे पति को सभी प्रकार की व्यसनों की आदत लग चुकी है जिस कारण में धर्म-कर्म के कार्य नही कर पाती और न ही ऋषियों को अन्न का दान कर पाती हूँ। हे मुनि! मुझ अबला पर कृपा कर ऐसा उपाय बतायें जिससे मैं माँ दुर्गा की पूजा-उपासना कर अपना तथा अपने पति के जीवन को सार्थक कर सकूँ।”
ऋषि श्रृंगी ने उस महिला की बात सुनकर और उसकी भक्ति भावना देखकर उससे कहा-“हे पुत्री! वर्ष मे चार प्रकार के नवरात्र होते हैं: चैत्र नवरात्र, शारदीय नवरात्र, आषाढ़ की नवरात्रि और माघ की नवरात्रि । चैत्र नवरात्र तथा शारदीय नवरात्र सभी जन समूहों को ज्ञात है, लेकिन आषाढ़ और माघ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्र कहते हैं।
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना होती है ।गुप्त नवरात्रि में माँ गुर्गा की उपासना करने से मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है । इस नवरात्रि मे मुख्य रूप से माँ दुर्गा के सर्वैश्वर्यकारिणी देवी के रूप का पूजन होता है। यदि गुप्त नवरात्र में पूजा पाठ ना करने वाला, व्यसनी इत्यादि मनुष्य भी माँ की साधना करें तो माँ दुर्गा उसको हर तरह के सौभाग्य प्रदान करती है। अत: हे पुत्री ! तुम इसी गुप्त नवरात्र की पूजा करो।”
ऋषि की यह बात सुनकर उस स्त्री ने गुप्त नवरात्र का पूजन विधिपूर्वक किया जिससे उसके घर में सुख सहाँति आ गई और उसका पति भी सही राह पर आ गया।

सोमवती अमावस्या व्रत विधि, कथा एवं उद्यापन हिंदी में- हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं ।
Somvati Amavasya vrat vidhi and Katha in Hindi According to Hindi Calender Amavasya falls in every month. But when it comes on Monday it is called Somvati Amavasya.

वट सावित्री व्रत विधि, पूजन सामग्री एवं कथा हिंदी में- ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती है उसका सुहाग अमर हो जाता है।
Vat Savitri Vrat Katha and Pujan Vidhi in Hindi - Vat savitri falls on amavasya tithi of krishna paksha jyeshta month. The woman who did this Vrat has got immortal suhag.


अनंत चतुर्दशी व्रत विधि एवं कथा हिंदी में - अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है । यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है ।
Anant Chaturdashi Vrat Katha and Vidhi in Hindi- People Worshipped God vishnu on Anant Chaturdashi. It falls on fourth day of Shukla Paksha Bhadra Month.

करवा चौथ व्रत विधि एवं कथा - करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिये करती हैं।
Karwa Chauth vrat vidhi and katha in Hindi - Karvaa chauth celebrates on fourth day of waning moon in kaartik month. Married women keep this fast with benediction of her husband long life.

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