Holika Dahan - होलिका दहन

फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि को होलिका दहन किया जाता है। शहर, गाँव, मुहल्ले के चौक-चौराहों पर सूखी लकड़ी एकत्रित कर फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि को होलिका दहन किया जाता है।

होलिका में आहुति देने वाली सामग्रियां (Things to cast into the Holi fire)

मकई ( कच्चे भुट्टे)
गेहूँ
नई फसल
कच्चे चने की बालियाँ

होलिका दहन पूजा सामग्री:-

माला
चावल
धूप
फूल कच्चा सूत
गुड़
साबुत हल्दी
बताशे
गुलाल
नारियल
गेहूँ और चने की बालियाँ
एक लोटा जल
गोबर के उपले धागे में पिरोये हुए

पुजन विधि:-

यह पूजा होलिका दहन के पहले की जाती है। पूजा करते समय आपका मुँह पूर्व की ओर होना चाहिये। कच्चे सूत को होलिका के चारों ओर सात बार परिक्रमा करते हुये लपेट दें। इसके बाद एक- एक करके सभी सामग्रियों को अर्पित करते हुये होलिका का पूजन अपने घरेलु परम्पराओं के अनुसार विधि पूर्वक करें। पूजन के बाद जल अर्पित करें। इसके बाद होलिका जलायी जाती है। होलिका में गेहूँ और चने की बालियों को पकाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होलिका में सेंके गये धान्यों को खाने से मनुष्य निरोगी रहता है।

पौराणिक कथा (Holika Dahan Story)

प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा (Story of Prahlad and Hiranyakashyap)
प्राचीन काल की बात है हिरण्यकश्यप नामक एक असुर था। उसने शिव जी को प्रसन्न करके अपने मृत्यु के सम्बंध में यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसकी मृत्यु न मनुष्य के हाथों हो, ना पशु के हाथों, ना किसी शस्त्र से, ना किसी अस्त्र से, ना दिन में, ना रात में, ना घर के बाहर, ना घर के अंदर। इस वरदान को पाकर हिरण्यकश्यप के मन में अहंकार हो गया। उसने अत्याचार करने प्रारम्भ कर दिये और सभी को देवताओं के पूजन के लिये मना कर दिया। उसने अपने आप को हीं देवता मान लिया। लेकिन सन्योगवश उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त हो गया। प्रहलाद हमेशा विष्णु पूजन में लगा रहता। हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन सफल ना हो सका। अंतत: हिरण्यकश्यप ने अपने बहन होलिका को आदेश दिया कि वह प्रहलाद को गोद में लेकर जलती आग में बैठ जाये। जिससे प्रहलाद की मृत्यु हो जाय। हिरण्यकश्यप की बहन को एक चादर मिली हुई थी जिसको शरी के चारों ओर लपेट लेने पर आग में रक्षा हो सकती थी। अत: होलिका ने उस चादरको अपने चारों ओर लपेट कर प्रहलाद को ले आग में बैठ गई। लेकिन कहते हैं ना –“जाको राखे साइयाँ ,मार सके ना कोय। बाल न बाँका कर सके, जो जग बैरी होय।” इसलिये देवयोग से वह चादर होलिका से हटकर प्रहलादके चारों ओर लग गई और होलिका की मृत्यु आग में जलने से हो गयी। प्रहलाद उस आग में से भगवान विष्णु का नाम लेते हुये सुरक्षित बाहर आ गया।
इसीलिये बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन किया जाता है।

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Somvati Amavasya vrat vidhi and Katha in Hindi According to Hindi Calender Amavasya falls in every month. But when it comes on Monday it is called Somvati Amavasya.

वट सावित्री व्रत विधि, पूजन सामग्री एवं कथा हिंदी में- ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती है उसका सुहाग अमर हो जाता है।
Vat Savitri Vrat Katha and Pujan Vidhi in Hindi - Vat savitri falls on amavasya tithi of krishna paksha jyeshta month. The woman who did this Vrat has got immortal suhag.

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Anant Chaturdashi Vrat Katha and Vidhi in Hindi- People Worshipped God vishnu on Anant Chaturdashi. It falls on fourth day of Shukla Paksha Bhadra Month.

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