मकर संक्रांति

इस वर्ष मकर संक्रांति १४ जनवरी, २०१७ (शनिवार) को है। पौष माह में जब सुर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, उस दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। अधिकांशत: यह त्योहार जनवरी महीने के १३ या १४ या १५ तारीख को मनाया जाता है। मकर संक्रांति की तिथि सुर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश करने पर निर्भर करती है। इस तिथि से सुर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ होती है। इसलिये यह उत्तरायणी भी कही जाती है।

मकर संक्रान्ति का महत्व

पुराणों के अनुसार दक्षिणायण का अर्थ देवताओं की रात्रि या नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। मकर संक्रांति के दिन से सुर्य उत्तरायण हो जाते हैं। इस दिन से सभी शुभ कार्य, धर्म-कर्म शुरु किये जाते हैं। मकर संक्रांति के दिन जो भी दान किया जाता है उसका फल अन्य दिनों से सौ गुणा प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, घी, कम्बल इत्यादि दान किये जाते हैं।

मकर संक्रांति पूजा सामग्री:-

• सुर्यदेव की प्रतिमा
• चंदन
• पुष्प
• पुष्प माला
• अक्षत
• धूप
• दीप
• घी
• गंध
• कलश
• नैवेद्य
• चौकी अथवा लकड़ी का पटरा
• आसन
• जल-पात्र

मकर संक्रांति पूजा विधि:-

मकर संक्रांति के दिन प्रात:काल उठ नित्य क्रम कर दातुन करें। उसके पश्चात तिलमिश्रित जल से स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को शुद्ध कर लें। भूमिपर चंदन से कर्णिका सहित अष्टदल कमल बनायें। कमल पर सुर्य देव का आवाहन कर उन्हें स्थापित करें।।
सुर्य स्थापना के मंत्र:-
सुर्याय नम: (इस मंत्र से कर्णिका में सुर्य देव को स्थापित करें।)
आदित्याय नम: (इस मंत्र से पूर्वदल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
सप्तार्चिषे नम: (इस मंत्र से अग्निकोण स्थित दल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
ऋङ्मण्डलाय नम: (इस मंत्र से दक्षिणदल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
सवित्रे नम: (इस मंत्र से नैऋत्य कोणवाले दल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
वरुणाय नम: (इस मंत्र से पश्चिमदल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
सप्तसप्तये नम: (इस मंत्र से वायव्य कोण वाले दल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
मार्तण्डाय नम: (इस मंत्र से उत्तरदल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
विष्णवे नम: (इस मंत्र से ईशान कोण वाले दल में सुर्य देव को स्थापित करें।)
इस प्रकार हाथ में अक्षत लेकर मंत्र के द्वारा सुर्य देव को स्थापित करे। उसके बाद उनकी अर्चना करे।
लकड़ी के पटरे अथवा चौकी पर सुर्यदेव की प्रतिमा स्थापित करे। अक्षत, चंदन ,धूप, दीप, पुष्प, पुष्पमाला, नैवेद्य आदि से सुर्यदेव की पूजा करें और उन्हें अर्घ्य प्रदान करें। तत्पश्चात यथाशक्ति सोने/चाँदी का कमल बनवाकर उसे घृतपूर्ण पात्र और कलश के साथ ब्राह्मण को दान करें। इसके बाद चंदन और पुष्पयुक्त जल से भूमिपर सुर्यदेव को अर्घ्य प्रदान करें। अर्घ्य प्रदान करते समय इस प्रकार कहें – “अनन्त! आप ही विश्व हैं, विश्व आपका सवरूप है, आप विश्व में सर्वाधिक तेजस्वी, स्वयं उत्पन्न होनेवाले, धाता और ऋग्वेद, सामवेद एवं यजुर्वेद के स्वामी है, आपको बारम्बार नमस्कार है।” इस विधि से यह पूजा प्रत्येक संक्रांति को अथवा वर्ष में एक बार सारा कार्य बारह बार करें। यह सब कामनाओं को पूर्ण करनेवाला और स्वर्ग में अक्षय फल प्रदायक है।
मकर संक्राति हमारे देश में हर प्रांत में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।

मकर संक्रांति की पौराणिक कथाएं उत्तर प्रदेश और बिहार पंजाब और हरियाणा महाराष्ट्र तमिलनाडु पश्चिम बंगाल असम राजस्थान

सोमवती अमावस्या व्रत विधि, कथा एवं उद्यापन हिंदी में- हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं ।
Somvati Amavasya vrat vidhi and Katha in Hindi According to Hindi Calender Amavasya falls in every month. But when it comes on Monday it is called Somvati Amavasya.

वट सावित्री व्रत विधि, पूजन सामग्री एवं कथा हिंदी में- ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती है उसका सुहाग अमर हो जाता है।
Vat Savitri Vrat Katha and Pujan Vidhi in Hindi - Vat savitri falls on amavasya tithi of krishna paksha jyeshta month. The woman who did this Vrat has got immortal suhag.


अनंत चतुर्दशी व्रत विधि एवं कथा हिंदी में - अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है । यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है ।
Anant Chaturdashi Vrat Katha and Vidhi in Hindi- People Worshipped God vishnu on Anant Chaturdashi. It falls on fourth day of Shukla Paksha Bhadra Month.

करवा चौथ व्रत विधि एवं कथा - करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिये करती हैं।
Karwa Chauth vrat vidhi and katha in Hindi - Karvaa chauth celebrates on fourth day of waning moon in kaartik month. Married women keep this fast with benediction of her husband long life.

© 2016 - vratkatha.in - All rights reserved

About Contact Disclaimer