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संकटा माता व्रत विधि आरती एवं कथा
Sankata Mata Vrat Vidhi, Aarti and Katha in Hindi

संकटा माता का व्रत शुक्रवार को करना चाहिये। यह व्रत किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरू कर सकते हैं। यह व्रत कोई भी श्रद्धालु कर सकते हैं। सौभाग्यवती स्त्रियाँ अपने सौभाग्य की वृद्धि के लिये, कुँवारी कन्याएं अपने इच्छित वर के लिये, छात्र परीक्षा में सफलता के लिये और अन्य व्यक्ति अपने मनोकामनाओं के पूरी होने के लिये यह व्रत करते हैं। इस व्रत के करने से मनुष्य को सभी प्रकार के रोगों एवं समस्त दु:ख से मुक्ति मिल जाती है।

पूजन सामग्री:-

• संकटा माता की मूर्ति अथवा चित्र • लाल वस्त्र – 2 ( एक चौकी पर बिछाने के लिये और एक अर्पित करने के लिये) • धूप • दीप • घी • उड़हुल अथवा लाल फूल • पुष्पमाला • नैवेद्य(चावल का चूरा बनाकर ,उसमें घी तथा शक्कर मिलायें और लड्डु बनायें) • ऋतुफल(केला,संतरा,नारियल ) • सिंदूर

संकटा माता व्रत विधि -Sankata Mata Vrat Vidhi

प्रात:काल नित्य क्रम कर स्नान कर लें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा घर को स्वच्छ कर लें। एक पटरे अथवा चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें। उस पर संकटा माता की मूर्ति अथवा चित्र स्थापित करें। एक कलश में जल भर कर रखें। अब संकटा माता की पूजा करें। धूप-दीप दिखायें। नैवेद्य का भोग लगायें। दोनों हाथ जोड़कर संकटा माता का ध्यान करें और इस प्रकार कहें-

“दस भुजाओं तथा तीन नेत्रों से सुशोभित गुणमयी, लाल वर्णवाली, शुभ्रांगी, शीघ्रही संकटनाशिने, शुद्ध स्फटिक की माला, जलपूर्ण कलश, कमल, पुष्प, शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, डमरू तथा तलवार आदि से शोभाग्यमान भगवती संकटा का मैं ध्यान करता हूँ।”

इसके बाद कथा सुने अथवा सुनायें। कथा पूर्ण होने के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें। शाम होने पर अपना उपवास खोले। भोजन में केवल मीठी वस्तुयें ही ग्रहण करें।

संकटा माता व्रत कथा प्रारम्भ:-

sankta mata ki katha in hindi

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