मां वैष्णो देवी - Maa Vaishno Devi

कब जाएं:-

यवैष्णो देवी की यात्रा वर्ष के 12 महीनों खुली रहती है। लेकिन नवरात्रों में यहाँ जाने का विशेष महत्व है।

कैसे जाएं :-

वैष्णो देवी जाने के लिये जम्मू तक रेल व बस दोनों प्रकार की सुविधा है। जम्मू से कटरा तक बस सुविधा उपलब्ध है। जम्मू और कटरा की दूरी 52 कि. मी. है। जम्मू तक देश के हर प्रदेश से रेल की सुविधा है। यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा जम्मू है, इस हवाई अड्डे से सांझी छत तक प्रत्येक रोज हेलीकाप्टर की भी सुविधा है।

कहाँ ठहरें :-

कटरा में धर्मशाला व विभिन्न प्रकार के होटल हैं, जहाँ आप रूक सकते हैं । गुफा के पास और गुफा के मार्ग में वैष्णो देवी बोर्ड के द्वारा आधुनिक धर्मशालाएं व होटल भी है, जिनमें यात्रियों के लिये अच्छी व्यवस्था की गई है।

महत्व:-

असमर्थ को समर्थ करने वाली शक्ति को माँ के नाम से जाना जाता है। प्रभु की निराकार रूप को ही शिव एवं शक्ति के साकार रूप में माना गया है। शक्ति की पूजा परम्परा हमारे देश में सदियों से चली आ रही है। यह एक अदृश्य शक्ति हैं जिसे भक्त हमेशा अपने आस-पास महसूस करते हैं। इन्हीं शक्तियों मे से एक है माँ वैष्णो देवी। यह एक सिद्द पीठ है जो महासरस्वती, महाकाली और महालक्ष्मी देवी के प्रतीक के रूप में है।

कटरा से शुरु होती है यात्रा:-

वैष्णो देवी यात्रा कटरा नामक कस्बे से शुरु होती है। कटरा में एक केंद्र बना हुआ है जहाँ पर जाकर यात्रा के पहले सभी भक्तों को अपने नाम की पर्ची कटवानी होती है। यहाँ पर सभी भक्तों का नाम, निवास स्थान (जहाँ से आये हैं) दर्ज किया जाता है एवं कम्प्युटर से सभी भक्तों की फोटो भी ली जाती है। इसके बाद एक पर्ची मिलती है जिसमें एक नम्बर लिखा होता है। यह यात्रा पर्ची नि:शुल्क है। इसके बाद आप यात्रा शुरु कर सकते हैं।

“बाण गंगा”

थोड़ी चढाई के बाद “बाण गंगा” का चैक पॉइंट है। यात्रियों को यात्रा पर्ची 'बाण गंगा' चैक पॉइंट पर इंट्री के समय दिखानी होती है। यात्रा पर्ची कटने के तीन घंटे के अंदर हीं इस पर्ची को 'बाण गंगा' चैक पॉइंट पर दर्ज करवा सकते हैं, तीन घंटे से अधिक होने पर यह पर्ची अमान्य होती है। कटरा से “बाण गंगा” की दूरी 2.5 कि.मी. है। “बाण गंगा” त्रिकूटा पर्वत के चरणों में बहती है। “बाण गंगा” मे यात्री स्नान करते हैं । इसके बाद यहाँ से “चरण पादुका” के लिये चल पड़ते हैं।

“चरण पादुका”

बाण गंगा से चरण पादुका की दूरी लगभग 1 कि. मी. है। ऐसा उल्लेख मिलता है कि माँ वैष्णो देवी इसी स्थान पर सबसे पहले ठहरी थी और पीछे मुड़ कर देखा था कि भैरों उनके पीछे आ रहा है या नहीं। इस स्थान पर आज भी माँ वैष्णो देवी के चरणों के निशान मौजूद हैं। भक्तगण यहाँ पर “चरण पादुका” का दर्शन करते हैं और आगे की ओर बढ़ते हैं।

“आदिकुमारी”

“चरण पादुका” के बाद भक्तगण “आदिकुमारी” की ओर चलते हैं। यह कटरा और भवन के मध्य का भाग है। यहाँ आधी यात्रा पूरी हो जाती है। यहाँ पर “गर्भ जून” नामक गुफा है। इसी गुफा में माँ वैषष्णो देवी ने नौ महीने निवास किया था, इसी कारण से इस गुफा का नाम “गर्भ जून” पड़ा। इस गुफा की यात्रा करना सौभाग्य की बात कही जाती है। इस गुफा में जाने के लिये काफी भीड़ होती है। यहाँ पर नम्बर के हिसाब से गर्भ जून में प्रवेश करने का नियम है। यहाँ पर पर्ची कटवाई जाती है और नम्बर आने पर गर्भ-जून में प्रवेश कर सकते हैं। नवरात्रि के दिनों में अधिक भीड़ होने के कारण भक्तगण माँ के दर्शन को जाते समय यहाँ पर्ची कटवाते हैं और लौटते समय “गर्भ-जून” से होकर गुजरते हैं।
“आदिकुमारी” से गुफा तक जाने के दो रास्ते हैं एक परम्परागत एवं दूसरा नवीन और आसान मार्ग । यहाँ से गुफा तक जाने के लिये वृद्ध,असहाय एवं बुजुर्गों के लिये टैक्सी सर्विस की भी व्यवस्था है। उसके लिये भी पर्ची कटवा कर गुफा तक पहुँचा जा सकता है।
सरल मार्ग से सीधा आप माँ के गुफा पहुँच सकते हैं और परम्परागत मार्ग पर थोड़ी कठिनाई के साथ जाना होता है।

हाथी मत्था:-

आदिकुमारी से हाथी मत्था की दूरी 2.75 कि.मी. है।आदिकुमारी से हाथी मत्था की चढ़ाई बहुत कठिन है। इसकी चढ़ाई बिल्कुल खड़ी है।

साँझीछत:-

आदिकुमारी से यह स्थान 4.5 कि.मी. है। यहाँ तक आने के लिये हेलिकाप्टर की भी सुविधा है।

भैरों घाटी:-

भवन से आधे कि. मी. की दूरी पर भैरो का मंदिर है। इसी स्थान पर भैरो का सिर गिरा था और बाद में माँ ने उसे आशीर्वाद दिया था कि मेरे दर्शन के लिये आये हुये यात्रियों की यात्रा भैरो के दर्शन के बाद ही पूरी होगी। इसलिये माँ के दर्शन के बाद भैरो मंदिर का दर्शन किया जाता है ।

भवन:

सांझी छत के बाद भवन के पास पहुँचने पर सभी यात्रियों को चेक प्वाइंट पर अपनी पर्ची दिखानी होती है और यहाँ पर एक नम्बर मिलता है उसी नम्बर के अनुसार अंदर गुफा में माँ के दर्शन होते हैं।
पर्ची लेने के बाद आप भवन के पास पहुँचते हैं। वहीं आस-पास कई सारी दुकानें है, जहाँ से भक्तगण माता को अर्पित करने के लिये चुन्नी, छत्र, नारियल इत्यादि खरीदते हैं। इसके बाद भवन का प्रवेश द्वार है वहीं पर यात्री नम्बर डिस्पले होता है। उसी नम्बर के अनुसार पंक्तिबद्ध होकर माँ के दर्शन करने होती हैं।
अब पुरानी गुफा का रास्ता बंद कर दिया गया है और नये रास्ते से गुफा में प्रवेश करने की व्यवस्था की गई है। एक-एक कर सभी यात्री एक ओर से गुफा में प्रवेश करते हैं और दूसरी ओर से निकलने की व्यवस्था है। बाहर आने पर सभी को चढ़ावे के अनूरूप प्रसाद और माँ वैष्णो देवी का एक सिक्का मिलता है। बाहर आप माँ के चढ़ाये हुये चुन्नी प्रसाद के रूप में खरीद सकते हैं।
यात्रा से लौटकर कन्या पूजन करने का भी प्रचलन है। यात्रियों के लिये बाण गंगा से भवन तक पिट्ठू, पालकी ,खच्चर भी उपलब्ध है जिसके द्वारा आप आसानी से माँ के दर्शन के लिये जा सकते हैं।मार्ग के बीच में कई सारी दुकाने भी है जहाँ शुद्ध खाना और पानी की व्यवस्था है। बीच-बीच में लाकर सुविधा भी है , उसमें आप अपना सामान जमा करवा कर यात्रा कर सकते हैं।

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