Jaya Ekadashi Vrat Katha 2022 | जया एकादशी व्रत कथा 2022

Jaya Ekadashi Vrat Katha: माघ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम जया है। इस एकादशी व्रत से मनुष्य ब्रह्महत्या के पाप से छूट जाते है और अन्त में उनको स्वर्ग प्राप्ति होती है। इस व्रत से मनुष्य कुयोनि अर्थात भूत, प्रेत, पिशाच आदि की योनि से छूट जाता है।

जया एकादशी व्रत कथा | Jaya Ekadashi Vrat Katha

एक समय इन्द्र नाग-लोक में अपनी इच्छानुसार अप्सराओं के साथ रमण कर रहा था। गंधर्वगान कर रहे थे। वहां गन्धर्वों से प्रसिद्ध पुष्पवन्त, उसकी लड़की तथा चित्रसेन की स्त्री मलिन ये सब थे। उस जगह मलिन का लड़का पुष्पवान और उसका लड़का माल्यवान भी था। उस समय पुष्पवती नामक गंधर्व स्त्री माल्यवान को देखकर मोहित हो गई और कामबाण से चलायमान होने लगी। उसने रूप, सौन्दर्य, हाव-भाव आदि द्वारा माल्यवान को वश में कर लिया। पुष्पवती के सौंदर्य को देखकर माल्यवान भी मोहित हो गया। 

अतः ये दोनों कामदेव के वश में हो गये। परन्तु फिर भी इंद्र के बुलाने पर नाच गाने के लिए जाना पड़ा और अप्सराओं के साथ गाना शुरू किया। परन्तु कामदेव के प्रभाव से इनका मन न लगा और अशुद्ध गाना गाने लगे इनकी भाव भृंगीयों को देखकर इन्द्र ने इनके प्रेम को समझ लिया और इसमें अपना अपमान समझ इन्द्र इन्हें श्राप दे दिया कि तुम स्त्री पुरुष के रूप में मृत्युलोक में जाकर पिशाच का रूप धारण करो और अपने कर्मों का फल भोगो। 

इन्द्र का श्राप सुनकर से अत्यन्त दुखी हुए और हिमाचल पर्वत पर पिशाच बनकर दुख पूर्वक अपना जीवन व्यतीत करने लगे। रात दिन में उन्हें एक क्षण भी नींद नहीं आती थी। इस स्थान अत्यन्त सर्दी थी। एक दिन पिशाच ने अपनी स्त्री से कहा- न मालूम हमने पिछले जन्म ऐसे कौन से पाप किए है। जिसके हमें इतनी दुखदायी यह पिशाच योनि प्राप्त हुई है। दैवयोग से एक दिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की जया नाम की एकादशी आई। इस दिन दोनों ने कुछ भी भोजन न किया और न कोई पाप कर्म किया। इस दिन केवल फल-फूल खाकर ही दिन व्यतीत किया और महान दुख के साथ पीपल के वृक्ष के नीचे बैठ गए। 

वह रात्रि इन दोनों ने एक दूसरे से चिपट कर बड़ी कठिनता के साथ काटी। सर्दी के कारण उनको निद्रा भी न आई। दूसरे दिन प्रातः काल होते ही भगवान के प्रभाव से इनकी पिशाच देह छूट गई और अत्यन्त सुन्दर अप्सरा और गंधर्व की देह धारण करके तथा सुंदर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलंकृत होकर नागलोक को प्रस्थान किया। आकाश में देवगण तथा गंधर्व इनकी स्तुति करने लगे। नागलोक में जाकर इन दोनों ने देवराज इन्द्र को प्रणाम किया।

इन्द्र को भी इन्हें अपने प्रथम रूप में देखकर महान आश्चर्य हुआ और इनसे पूछने लगे कि तुमने अपनी पिशाच देह से किस प्रकार छुटकारा पाया सो सब बताओ। इस प्रकार माल्यवान बोले कि हे देवेन्द्र! भगवान विष्णु के प्रभाव से तथा जया एकादशी के व्रत के पुण्य से हमारी पिशाच देह छूटी है। इन्द्र बोले – ‘हे माल्यवान! एकादशी व्रत करने से तथा भगवान विष्णु के प्रभाव से तुम लोग पिशाच की देह को छोड़कर पवित्र हो गए हो और हम लोगों के भी वन्दनीय हो गए हो क्योंकि शिव भक्त हम लोगों के वंदना करने योग्य है। अतः आप दोनों धन्य है। अब तुम पुष्पवती के साथ जाकर विहार करो।

FAQs About Jaya Ekadashi Vrat Katha

Q1. जया एकादशी व्रत कथा 2022?

12 फरवरी, शनिवार

Q2. जया एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए?

इस व्रत में फल फ्रूट्स खा सकते है।

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