Papmochani Ekadashi Vrat Katha 2022 | पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम पापमोचिनी है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्यों के अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं। आए जानते है इसकी कथा के बारे में। आए जानते है Papmochani Ekadashi Vrat Katha के बारे में।

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा | Papmochani Ekadashi Vrat Katha

प्राचीन समय में एक चैत्ररथ वन में अप्सरायें वास करती थी। वहां हर समय वसन्त का मौसम रहता था। उसी वन में एक मेधावी नामक मुनि तपस्या करते थे। वे शिव भक्त थे। एक दिन मंजुघोषा नामक एक अप्सरा उनको मोहित करने के लिए सितार बजाकर मधुर स्वर में गाने लगी। उस समय शिव के शत्रु कामदेव भी शिव भक्त मेधावी मुनि को जीतने के लिए तैयार हुए। कामदेव ने उस सुन्दर अप्सरा के भ्रू का धनुष बनाया। 

कटाक्ष को उसकी प्रत्यंचा (डोरी बनाई) और उसके नेत्रों को उसने संकेत बनाया और कुंचो को कुरी बनाया। उस मंजुघोषा अप्सरा को सेनापति बनाया। इस तरह कामदेव अपने शत्रुभक्त को जीतने को तैयार हुआ। उस समय मेधावी मुनि भी युवा तथा हृष्ट-पुष्ट थे। उन्होंने यज्ञोपवीत तथा दण्ड धारण कर रखा था। उस मुनि को देखकर मंजुघोषा ने धीरे-धीरे मधुरवाणी से वीणा पर गाना शुरू किया। 

मेधावी मुनि भी मंजुघोषा के मधुर गाने पर तथा उसके सौन्दर्य पर मोहित हो गये। वह अप्सरा मेधावी मुनि को कामदेव से पीड़ित जानकर आलिंगन करने लगी। महर्षि मेधावी उसके सौन्दर्य पर मोहित होकर शिव रहस्य को भूल गये और काम के वशीभूत होने के कारण उन्हें दिन रात्रि का कुछ भी ध्यान न रहा। एक दिन मंजुघोषा उस मुनि से बोली हे मुनि! अब मुझे बहुत समय हो गया है। स्वर्ग जाने की आज्ञा दीजिए। 

उस अप्सरा के ऐसे वचनों को सुनकर मुनि बोले – हे सुन्दरी! तू आज इस संध्या को आई है। अभी प्रातःकाल तक ठहरो। मुनि के वचनों को सुनकर वह उनके साथ रमण करने लगी और बहुत समय बिता दिया। फिर उसने कहा हे मुनिदेव! अब आप मुझे स्वर्ग को जाने की आज्ञा दीजिये। मुनि बोले – अरी! अभी तो कुछ भी समय नहीं हुआ है, अभी कुछ और देर ठहरो। मुनि की बात सुन अप्सरा ने कहा – हे मुनि! आपकी रात्रि तो बहुत लम्बी है। 

अब आप सोचिये कि मुझे आपके पास आये कितना समय हो गया। उस अप्सरा के वचनों को सुनकर मुनि को ज्ञान प्राप्त हो गया और समय का विचार करने लगे। जब रमण करने का समय का प्रमाण 57 (५७) साल हो गये है। तो उस अप्सरा को काल का रूप समझने लगे। वह महान क्रोधित हुए और तप नाश करने वाली अप्सरा की तरफ देखने लगे। उनके अधर कांपने लगे और इन्द्रियाँ व्याकुल होने लगीं। 

वह मुनि उस अप्सरा से बोले – हे दुष्टा! मेरे तप को नष्ट करने वाली! तू अब मेरे श्राप से पिशाचिनी हो जा। तू महान पापिनी और दुराचारिणी है। तुझे धिक्कार है। उस मुनि के श्राप से वह पिशाचिनी हो गई। तब वह बोली – हे मुनि! अब मुझ पर क्रोध को त्यागकर प्रसन्न हो जाओ और इस शाप का निवारण कीजिये। तब मुनि को कुछ शांति मिली और पिशाचिनी से बोले – रे दुष्ट! मैं शाप (श्राप) से छूटने का उपाय बतलाता हूँ। 

चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की जो एकादशी है। उसका नाम पापमोचिनी है। उस एकादशी का व्रत करने से तेरी पिशाचिनी की देह छूट जायेगी। इस प्रकार मुनि ने उसको समस्त विधि आदि बतला दी और अपने पिता च्यवन ऋषि के पास गये। च्यवन ऋषि अपने पुत्र को देखकर बोले – रे पुत्र! तूने यह क्या किया? तेरे समस्त तप नष्ट हो गये हैं। मेधावी बोले – हे पिताजी मैंने बहुत बड़ा पाप किया है। आप इस पाप से छूटने का उपाय बतलाइये। 

च्यवन ऋषि बोले – हे पुत्र! तुम चैत्र माह के कृष्ण पक्ष को पापमोचिनी नाम की एकादशी का विधि तथा भक्तिपूर्वक व्रत करो, अपने पिता के वचनों को सुनकर मेधावी ऋषि ने पापमोचिनी एकादशी का विधिपूर्वक उपवास किया। उसके प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए। मंजुघोषा अप्सरा भी पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से पिशाचिनी की देह से छूट गई और सुन्दर रूप धारण करके स्वर्गलोक चली गई। 

इस पापमोचिनी एकादशी के प्रभाव से सब पाप नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी कथा के श्रवण व पढ़ने से एक हजार गौदान करने का फल मिलता है। इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या करने वाले, अगम्बा गमन करने वाले आदि के पाप नष्ट हो जाते है और अन्त में स्वर्ग को जाते है।

पापमोचनी एकादशी का महत्व

पापमोचनी एकादशी व्रत का महत्व यह है कि इस व्रत को करने से सब पाप नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी कथा के श्रवण व पढ़ने से एक हजार गौदान करने का फल मिलता है। इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या करने वाले, अगम्बा गमन करने वाले आदि के पाप नष्ट हो जाते है और अन्त में स्वर्ग को जाते है।

FAQs About Papmochani Ekadashi Vrat Katha

Q1. पापमोचनी एकादशी कब है 2022?

28 मार्च, सोमवार, 2022

Q2. पापमोचनी एकादशी व्रत का क्या महत्व है?

इस व्रत को करने से सब पाप नष्ट हो जाते हैं। इस एकादशी कथा के श्रवण व पढ़ने से एक हजार गौदान करने का फल मिलता है। इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या करने वाले, अगम्बा गमन करने वाले आदि के पाप नष्ट हो जाते है और अन्त में स्वर्ग को जाते है।

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