श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी व्रत विधि एवं कथा
Ram Laxman Dwadashi Vrat Vidhi and Katha

ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की द्वादशी तिथि को श्रीराम द्वादशी व्रत होता है । इस तिथि को भगवान श्री राम जी की पूजा की जाती है । इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य को नि:संतान को संतान सुख की प्राप्ति होती है । इस व्रत को करनेवाले पुरुष स्वर्ग में विविध भोगों को भोगता है। वहाँ की अवधि समाप्त हो जाने पर वह पुन: मृत्य लोक में आता है। पृथ्वी पर आने पर वह सौ यज्ञ करनेवाला राजा होता है। जो इस व्रत को निष्काम भाव से करता है, उस पुरुष के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं।

श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी व्रत पूजन सामग्री:-

∗श्रीरामसहितलक्ष्मण जी की मूर्ति
∗कलश- 4
∗वस्त्र- 3
∗चौकी
∗पात्र- 4
∗तिल
∗धूप
∗दीप
∗अक्षत
∗चंदन
∗पुष्प
∗पुष्पमाला
∗नैवेद्य

श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी व्रत विधि - Ram Laxman Dwadashi Vrat Vidhi

ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को नियमपूर्वक भगवान श्री हरि का पूजन करें । उस समय पवित्र वस्त्र धारण कर विधिपूर्वक हवन करें । प्रसन्न मन से रहकर व्रती पुरुष को भली-भाँति सिद्ध किया हुआ हविष्यान्न ग्रहण करना चाहिये। फिर कम-से-कम पाँच पग दूर जाकर अपने पैर धोये। पुन: प्रात: काल उठकर शौच के बाद आठ अंगुलकी लम्बी दतुअन से मुख को शुद्ध करें । दतुअन के लिये किसी दूधवाले वृक्ष का लकड़ी उपयोग करे। इसके बाद विधिपूर्वक आचमन करना चाहिये। शरीर के नौ द्वार हैं, उन सभी द्वारों को स्पर्श कर फिर भगवान् जनार्दन का ध्यान करे। ध्यान का प्रकार यह है-

dwadashi puja vidhi

इस प्रकार कहकर दिन में नियमपूर्वक उपवास करे। रात्रि के समय देवाधिदेव भगवान नारायण के समीप बैठकर ‘ऊँ नमो नारायणाय’ इस मंत्र का जप कर व्रती को सो जाना चाहिये। फिर द्वादशी तिथि को प्रात:काल होनेपर व्रती पुरुष समुद्र तक जानेवाली नदी अथवा दूसरी भी किसी नदी या तालाब पर जाकर अथवा घर पर सन्यमपूर्वक रहकर हाथ में पवित्र मिट्टी लेकर यह मंत्र पढ़े-

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फिर जल के देवता वरुणसे प्रार्थना करे-

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इस प्रकार का विधान सम्पन्न कर मिट्टी और जल हाथ में ले अपने सिर पर लगाये। साथ ही शेष बची हुई मृतिका को तीन बार समस्त अंगों में लगाये । फिर उपर्युक्त वारुण मंत्र पढ़कर विधिपूर्वक स्नान करे। स्नान करने के पश्चात संध्या-तर्पण आदि नित्य-नियम सम्पन्न कर देवालय या फिर घर में बने पूजा गृह में जाये ।
सभी पूजन सामग्री एकत्रि कर लें। आसन पर बैठ जाये।
हाथ में अक्षत,कुंकुम, रोली एवं पुष्प लेकर श्रीहरि की निम्न मंत्रों से पूजन करें:-
ऊँ रामाभिरामाय नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के दोनों चरणों की पूजा करें
ऊँ त्रिविक्रमाय नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के कटिदेश की पूजा करें ।
ऊँ धृतविश्वाय नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के उदर की पूजा करें ।
ऊँ पाञ्चजन्याय नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के शंख की पूजा करें ।
ऊँ संवर्तकाय नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के कण्ट की पूजा करें ।
ऊँ सर्वास्त्रधारिणे नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के दोनों भुजाओं की पूजा करें ।
ऊँ सुदर्शनचक्राय नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के चक्र की पूजा करें ।
ऊँ सहस्त्रशिरसे नम: ( हाथ के रोली,पुष्प आदि समर्पित करें ) श्रीभगवान् के शिर-प्रदेश की पूजा करें ।

इसके बाद सामने चार जलपूर्ण कलश स्थापित करे। उन कलशोंको मालाओं से अलंकृत कर उनपर तिल से भरे पात्र रखे । इन चार कलशों को चार समुद्र मानकर उनके मध्यभाग में एक चौकी को स्थापित करें। उस चौकी के ऊपर लाल वस्त्र बिछायें एवं उसके ऊपर सनातन श्री हरि के चतुर्व्यूहरूप में अवतरित स्वर्णनिर्मित श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। वस्त्र अर्पित करें । तत्पश्चात् पुष्प, चंदन एवं अर्घ्य आदि उपचारों से पूजा करे। द्वादशी की कथा सुने। भगवान् के सामने श्रद्धा-भक्तिपूर्वक पूरी रात जागरण करे । प्रात:काल सुर्योदय होनेपर स्नान कर, पूजा करें । उसके बाद वह प्रतिमा दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दे । उसके बाद भोजन करें|

श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी व्रत कथा - Ram Laxman Dwadashi Vrat Katha

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी व्रत करना चाहिये। यह व्रत दशमी के दिन से ही शुरु हो जाता है। उस दिन व्रती को नियमपूर्वक पूजन तथा अन्न ग्रहण करना चाहिये। एकादशी के दिन स्नान इत्यादि कर्म से निवृत होकर व्रत का संकल्प करना चाहिये।भगवान का मंत्र जप कर भूमि पर शयन करें। द्वादशी को विधिपूर्वक पूजन एवं अर्चना करें। श्रीरामलक्ष्मण द्वादशी की कथा सुने । अगले दिन दान करने के पश्चात स्वयं भोजन करें।
दुर्वासा जी कहते हैं- “पहले पुत्र न होने पर महाराज दशरथ जी ने पुत्रकी कामना से वसिष्ठ जी की बड़ी आराधना की एवं पुत्रोत्पति का उपाय पूछा। तब वसिष्ठ जी ने उन्हें यही विधान बताया। इस व्रत के रहस्य को जानकर राजा दशरथ ने इसका अनुष्ठान किया, जिसके फलस्वरूप स्वयं भगवान श्रीहरि महान शक्तिशाली रामरूप में उनके पुत्र हुए। उस समय सनातन श्री हरि ने अपने को ( राम,लक्ष्मणादि) चार रूपों में विभक्त कर लिया था। ” यह तो यहाँ की बात हुई अब परलोक की बात सुनो। जब तक इंद्र और सम्पूर्ण देवता स्वर्ग में रहते हैं तबतक इस व्रत को करनेवाला पुरुष स्वर्ग में विविध भोगों को भोगता है। वहाँ की अवधि समाप्त हो जाने पर वह पुन: मृत्य लोक में आता है।पृथ्वी पर आने पर वह सौ यज्ञ करनेवाला राजा होता है। जो इस व्रत को निष्काम भाव से करता है, उस पुरुष के समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं। साथ ही उसे भगवान श्री हरि का कैवल्य-पद प्राप्त हो जाता है , जो स्वच्छ एवं सनातन है।

सोमवती अमावस्या व्रत विधि, कथा एवं उद्यापन हिंदी में- हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है । लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे, सोमवती अमावस्या कहते हैं ।
Somvati Amavasya vrat vidhi and Katha in Hindi According to Hindi Calender Amavasya falls in every month. But when it comes on Monday it is called Somvati Amavasya.

वट सावित्री व्रत विधि, पूजन सामग्री एवं कथा हिंदी में- ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सावित्री का व्रत किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि जो भी स्त्री इस व्रत को करती है उसका सुहाग अमर हो जाता है।
Vat Savitri Vrat Katha and Pujan Vidhi in Hindi - Vat savitri falls on amavasya tithi of krishna paksha jyeshta month. The woman who did this Vrat has got immortal suhag.


अनंत चतुर्दशी व्रत विधि एवं कथा हिंदी में - अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है । यह व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है ।
Anant Chaturdashi Vrat Katha and Vidhi in Hindi- People Worshipped God vishnu on Anant Chaturdashi. It falls on fourth day of Shukla Paksha Bhadra Month.

करवा चौथ व्रत विधि एवं कथा - करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी उम्र के लिये करती हैं।
Karwa Chauth vrat vidhi and katha in Hindi - Karvaa chauth celebrates on fourth day of waning moon in kaartik month. Married women keep this fast with benediction of her husband long life.

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