Vijaya Ekadashi Vrat Katha | विजया एकादशी व्रत कथा 2022

Vijaya Ekadashi Vrat Katha: आज हम फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी व्रत की कथा के बारे में जानेंगे। आए जानते इस कथा के बारे में।

विजया एकादशी व्रत कथा | Vijaya Ekadashi Vrat Katha

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम विजया है। इसके व्रत के प्रभाव से मनुष्य को विजय मिलती है। इस विजया एकादशी के माहात्म्य के श्रवण व पठन से समस्त पाप नष्ट हो जाते है। एक समय देवर्षि नारदजी ने जगतपिता ब्रह्मा जी से पूछा कि ब्रह्माजी! आप मुझे फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत विधान बताइए। ब्रह्मा जी बोले कि हे नारद! विजया एकादशी का व्रत प्राचीन तथा नए पापों को नष्ट करने वाला है। यह समस्त मनुष्यों को विजय प्रदान करता है। 

त्रेतायुग में श्री रामचन्द्रजी को जब चौदह वर्ष के लिए बनवास हो गया। तब वह श्री लक्ष्मण जी तथा माता सीता सहित पंचवटी में निवास करने लगे। इस जगह रावण ने माता सीता का हरण कर लिया। इस दुखद समाचार से श्रीरामजी अत्यन्त व्याकुल हुए और सीताजी की खोज में चल दिये। जंगल में घूमते-घूमते वे मरणासन्न जटायु के पास पहुँचे। जटायु ने उन्हें माता सीता के हरण का पूरा वृत्तांत श्री राम जी को बताया और उनकी गोद में प्राण त्यागकर स्वर्ग की तरफ प्रस्थान किया। 

कुछ आगे चलकर श्री राम व लक्ष्मण जी की सुग्रीव के साथ मित्रता हो गई और बालि का वध किया। श्री हनुमानजी ने लंका में जाकर माता सीता जी का पता लगाया। वहाँ से लौटकर हनुमानजी श्री रामचन्द्र जी के पास आए और सब समाचार कहे। श्री रामचन्द्र जी ने सुग्रीव की सहमति से वानरों, भालुओं की सेना सहित लंका को प्रस्थान किया। जब श्री रामचन्द्र जी समुद्र के किनारे पहुँच गये। तब उन्होंने महान अगाध, मगरमच्छ युक्त समुद्र को देखकर श्री लक्ष्मण जी से कहा- हे लक्ष्मण! समुद्र को हम किस प्रकार पार कर सकेंगे? 

श्री लक्ष्मण जी बोले- भ्राताश्री! यहाँ से करीब आधा योजन दूरी पर कुमारी द्वीप पर बकदालभ्य नाम के मुनि रहते है। आप उनके पास जाकर इसका उपाय पूछिये। लक्ष्मण जी के वचनों को सुनकर श्री रामचन्द्र जी बकदालभ्य ऋषि के पास गए और उनको प्रणाम करके बैठ गए। मुनि ने उनसे पूछा- ‘हे श्री राम! आपने किस प्रयोजन से मेरी कुटिया को पवित्र किया है, कृपा कर अपना प्रयोजन कहें प्रभु!’ श्री राम जी ने कहा- ‘हे महर्षि! मैं अपनी सेना सहित यहां आया हूँ और राक्षसों को जीतने लंका जा रहा हूँ। 

आप कृपाकर आप समुद्र को पार करने का कोई उपाय बताइये। आपके पास आने का मेरा यही प्रयोजन है।’ बकदालभ्य ऋषि बोले- ‘हे श्रीराम! मैं आपको एक अति उत्तम व्रत बतलाता हूँ। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने से आप अवश्य ही समुद्र को पार कर लेंगे और आपकी विजय होगी। हे श्री राम जी! इस व्रत की विधि यह है- दशमी के दिन स्वर्ण, चाँदी, तांबा या मिट्टी किसी का एक घड़ा बनाएं। उस घड़े को जल से भरकर तथा उस पर पंचपल्लव रखकर वेदिका पर स्थापित करे। घड़े के नीचे सतनजा (सात अनाज मिले हुए) और ऊपर जौ रखें। उस पर श्री नारायण भगवान की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करें। 

एकादशी के दिन स्नान आदि से नित्य क्रम से निवृत्त होकर धूप, दीप, नैवेद्य, नारियल आदि से भगवान की पूजा करें। उस दिन भक्ति पूर्वक घड़े के सामने व्यतीत करे और रात को भी उसी तरह बैठे रहकर जागरण करना चाहिए। द्वादशी के दिन नदी या तालाब के किनारे स्नान आदि से निवृत्त होकर उस घड़े को ब्राह्मण को दे देना चाहिए। हे राम! यदि आप इस व्रत को सेनापतियों के साथ करोगे। तो अवश्य ही विजयी होंगे। श्री रामचन्द्र जी ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया और इसके प्रभाव से दैत्यों के ऊपर विजय पाई।

FAQs About Vijaya Ekadashi Vrat Katha

Q1. 2022 में विजया एकादशी कब की है?

26 फरवरी, शनिवार

Q2. विजया एकादशी का महत्व क्या है?

इस व्रत के प्रभाव से दुख दूर हो जाते है और समग्र कार्य में विजय प्राप्त होती है।

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